सेवाधारी की विशेषता
सेवाधारी की विशेषता ही है त्याग और तपस्या। जहाँ त्याग और तपस्या है वहाँ सेवाधारी की सदा सफलता है। सेवाधारी अर्थात् जिसका एक बाप के सिवाए और कोई नहीं। एक बाप ही सारा संसार है। जब संसार ही बाप हो गया तो और क्या चाहिए। सिवाए बाप के और दिखाई न दे। चलते-फिरते, खाते-पीते एक बाप दूसरा न कोई। यही स्मृति में रखना अर्थात् सफलता मूर्त बनना।

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